Why in News
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The National Tiger Conservation Authority (NTCA) has restricted the definition of tiger corridors only to:
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32 “least cost pathways” identified in a 2014 report.
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Corridors mentioned in Tiger Conservation Plans (TCPs).
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This excludes newer scientific studies, including:
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Work by the Wildlife Institute of India (WII).
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Data from All-India Tiger Estimation (AITE).
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The matter is under judicial scrutiny, with the Bombay High Court hearing a case on whether this move is legally valid.
About National Tiger Conservation Authority (NTCA)
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Statutory body under Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEFCC).
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Established in 2005 through amendment of Wildlife (Protection) Act, 1972 (added in 2006).
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Leadership structure:
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Chaired by: Union Minister of Environment, Forest and Climate Change.
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Vice-Chairperson: Minister of State for Environment.
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Member Secretary: Senior MoEFCC officer (generally Additional DG, Wildlife).
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Members: Experts in ecology, wildlife, tribal welfare, NGOs, and MPs.
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Field interface: Works with State Forest Departments, Tiger Reserves, and the Wildlife Institute of India.
Functions and Powers
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Approves Tiger Conservation Plans (TCPs) prepared by states.
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Frames guidelines on:
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Tourism.
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Coexistence.
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Management of buffer areas.
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Ensures ecological connectivity by notifying and managing tiger corridors.
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Provides financial aid for tiger conservation projects.
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Conducts periodic appraisals of tiger status and habitat.
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Exercises powers under Section 38(O) of Wildlife (Protection) Act to regulate projects in tiger reserves and corridors.
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Oversees implementation of:
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Project Tiger.
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All-India Tiger Estimation (AITE).
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Significance of the Current Issue
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Conservation setback:
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Ignoring WII studies and AITE data weakens corridor protection.
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Industrial benefit:
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Allows mining and infrastructure projects to escape stricter environmental scrutiny.
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Legal implications:
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Bombay High Court case will test whether NTCA’s decision is consistent with its statutory mandate.
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Ecological risk:
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Narrowing corridors to limited routes threatens long-term tiger gene flow and survival.
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बाघ गलियारों की परिभाषा सीमित करता NTCA
समाचार में क्यों
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राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने बाघ गलियारों की परिभाषा को केवल इन तक सीमित कर दिया है:
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2014 की एक रिपोर्ट में पहचाने गए 32 “लीस्ट कॉस्ट पाथवे”।
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बाघ संरक्षण योजनाओं (TCPs) में उल्लेखित गलियारे।
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इसमें नए वैज्ञानिक अध्ययनों को शामिल नहीं किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
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भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) का कार्य।
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अखिल भारतीय बाघ गणना (AITE) से प्राप्त डाटा।
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यह मामला न्यायिक समीक्षा के अधीन है, बॉम्बे हाईकोर्ट इस कदम की वैधता पर सुनवाई कर रहा है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के बारे में
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वैधानिक निकाय: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत।
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स्थापना: 2005 में, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में संशोधन (2006 में जोड़ा गया)।
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नेतृत्व संरचना:
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अध्यक्ष: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री।
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उपाध्यक्ष: राज्य मंत्री (पर्यावरण)।
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सदस्य सचिव: MoEFCC का वरिष्ठ अधिकारी (आमतौर पर अतिरिक्त डीजी, वन्यजीव)।
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सदस्य: पारिस्थितिकी, वन्यजीव, जनजातीय कल्याण, एनजीओ और सांसदों से विशेषज्ञ।
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मैदानी स्तर पर काम: राज्य वन विभागों, बाघ अभयारण्यों और भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ कार्य करता है।
कार्य और शक्तियाँ
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राज्यों द्वारा तैयार की गई बाघ संरक्षण योजनाओं (TCPs) को मंजूरी देता है।
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दिशा-निर्देश तैयार करता है, जैसे:
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पर्यटन।
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सह-अस्तित्व।
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बफर क्षेत्रों का प्रबंधन।
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बाघ गलियारों को अधिसूचित और प्रबंधित करके पारिस्थितिकीय संपर्क सुनिश्चित करता है।
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बाघ संरक्षण परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
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बाघों की स्थिति और आवास का समय-समय पर मूल्यांकन करता है।
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वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 38(O) के तहत शक्तियों का उपयोग करके बाघ अभयारण्यों और गलियारों में परियोजनाओं को नियंत्रित करता है।
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निम्नलिखित का कार्यान्वयन देखता है:
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प्रोजेक्ट टाइगर।
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अखिल भारतीय बाघ गणना (AITE)।
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वर्तमान मुद्दे का महत्व
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संरक्षण पर असर:
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WII के अध्ययनों और AITE डाटा की अनदेखी से गलियारों की सुरक्षा कमजोर होती है।
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औद्योगिक लाभ:
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खनन और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को कड़े पर्यावरणीय परीक्षण से छूट मिलती है।
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कानूनी प्रभाव:
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बॉम्बे हाईकोर्ट यह परखेगा कि NTCA का निर्णय उसके वैधानिक दायित्व के अनुरूप है या नहीं।
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पारिस्थितिकीय जोखिम:
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गलियारों को सीमित रास्तों तक सीमित करना बाघों के दीर्घकालिक जीन प्रवाह और अस्तित्व को खतरे में डालता है।
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