Why in News
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Recent studies show a considerable rise in plastic sediments in agricultural soil across Asia.
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This raises concerns about environmental and food security impacts.
What is Agricultural Plastic Pollution?
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Refers to accumulation of plastic materials in soil due to agricultural practices.
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Sources include:
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Mulch films
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Irrigation pipes
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Packaging
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Seedling trays
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Pond liners
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Polyhouses
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Food storage materials
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Asia is the largest user of agri-plastics, accounting for almost half of global usage (FAO).
How Plastic is Used in Agriculture?
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Widely used in modern commercial agriculture.
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Applications:
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Mulching
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Micro-irrigation
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Pond liners
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Seedling trays
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Polyhouses
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Food storage, packaging, and transportation
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Polyethylene film:
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Moderates soil temperature
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Controls weeds
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Prevents moisture loss
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Boosts crop yield (cotton, maize, wheat) by ~30% at low cost
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Leaves behind residues up to 300 kg per hectare
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Just 1 kg of mulching sheet can contaminate 700 sq. ft. of land
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FAO report (2021):
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Agricultural value chains used 12 MT of plastic in plant/animal production (2019)
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37.3 MT in food packaging (2019)
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Impacts of Plastic Pollution in Agriculture
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Soil health: Reduces fertility and microbial activity.
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Ecosystems: Disrupts sustainable farming practices.
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Air circulation: Plastic fragments hinder soil aeration.
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Example:
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Research in Karnataka & Maharashtra found high microplastic contamination.
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87.57 pieces/kg soil recorded at a Maharashtra dumpsite.
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Plant growth:
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Reduces root biomass
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Harms soil organisms like earthworms
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Food chain inflow:
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Microplastics absorbed by plants
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Risk to human health
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Challenges in Tackling Agricultural Plastic Pollution
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Policy neglect: Overshadowed by urban waste and water pollution issues.
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Short-term approach: Focus on seasonal crop productivity, ignoring long-term impacts.
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Uninformed farmers: Lack awareness of harmful effects.
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Inadequate policies:
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Roadmaps (e.g., Maharashtra Plastic Action Plan) don’t address agri-plastics sufficiently.
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Poor waste management:
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Only 9% of plastics are recycled worldwide
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90% of Indian villages lack waste management systems
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67% of households burn plastic waste
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Knowledge gap: Scientific understanding of damage from agri-plastics is recent.
How to Tackle Agricultural Plastic Pollution?
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Awareness & Training: Educate farmers about harmful consequences.
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Research & Development: Develop bio-plastics and sustainable alternatives.
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Ban Single-use Plastics: Strict prohibition in agriculture.
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Circular Economy Approach: Reduce, reuse, recycle.
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Policy & Legal Action:
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Legally binding framework with targets
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Hold plastic manufacturers responsible for end-of-life disposal
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Village-level Climate Action Plans:
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Integrate waste management with climate-resilient agriculture
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Monitoring & Enforcement:
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Penalize open burning, dumping, and unsafe disposal
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Community Participation: Encourage local waste management initiatives.
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Sustainable Farming Practices:
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Regenerative agriculture (cover cropping, conservation farming)
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Bio-mulching, vermicomposting, bio-fertilizers, bio-pesticides
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Soil and moisture conservation to reduce plastic dependency
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FAO Guidelines:
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2019 studies + Voluntary Code of Conduct (2024) on sustainable use of plastics in agriculture
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Quick Facts – Plastic Production & Pollution
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First synthetic plastic: 1907.
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Global production:
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2 MT in 1950
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Over 450 MT annually today
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Plastic waste leakage: 19–23 MT annually into aquatic ecosystems.
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Soil pollution: ~13 MT accumulates in agricultural soil each year.
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Microplastics are now found in animals, plants, fruits, bottled water, and human bodies.
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Example: 1 litre of bottled water contains ~240,000 plastic particles.
सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल :
क्यों खबरों में
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हाल के अध्ययनों से पता चला है कि एशिया में कृषि मिट्टी में प्लास्टिक अवसादों में काफी वृद्धि हुई है।
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इससे पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरे की आशंका बढ़ गई है।
कृषि प्लास्टिक प्रदूषण क्या है?
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कृषि पद्धतियों के कारण मिट्टी में प्लास्टिक सामग्री का जमा होना।
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स्रोत:
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मल्च फिल्म
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सिंचाई पाइप
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पैकेजिंग
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पौधशाला ट्रे
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तालाब लाइनर
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पॉलीहाउस
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खाद्य भंडारण सामग्री
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एशिया कृषि-प्लास्टिक का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो वैश्विक उपयोग का लगभग आधा हिस्सा है (FAO)।
कृषि में प्लास्टिक का उपयोग कैसे होता है?
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आधुनिक वाणिज्यिक कृषि में व्यापक उपयोग।
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उपयोग:
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मल्चिंग
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सूक्ष्म सिंचाई
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तालाब लाइनर
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पौधशाला ट्रे
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पॉलीहाउस
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खाद्य भंडारण, पैकेजिंग और परिवहन
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पॉलीथीन फिल्म:
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मिट्टी का तापमान नियंत्रित करती है
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खरपतवार नियंत्रण
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नमी की हानि रोकती है
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फसल उत्पादन (कपास, मक्का, गेहूं) को लगभग 30% तक कम लागत पर बढ़ाती है
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प्रति हेक्टेयर 300 किलोग्राम तक अवशेष छोड़ती है
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केवल 1 किलोग्राम मल्चिंग शीट 700 वर्ग फुट भूमि को प्रदूषित कर सकती है
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FAO रिपोर्ट (2021):
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कृषि मूल्य श्रृंखला ने पौधा/पशु उत्पादन में 12 मिलियन टन प्लास्टिक का उपयोग किया (2019)
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खाद्य पैकेजिंग में 37.3 मिलियन टन (2019)
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कृषि में प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभाव
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मिट्टी का स्वास्थ्य: उर्वरता और सूक्ष्मजीव गतिविधि कम होती है।
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पारिस्थितिकी तंत्र: सतत कृषि पद्धतियाँ प्रभावित होती हैं।
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वायु परिसंचरण: प्लास्टिक कण मिट्टी में वायुसंचार को रोकते हैं।
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उदाहरण:
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कर्नाटक और महाराष्ट्र के शोध में उच्च माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण पाया गया।
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महाराष्ट्र के एक डंपसाइट पर 87.57 टुकड़े/किग्रा मिट्टी दर्ज किए गए।
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पौधों की वृद्धि:
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जड़ बायोमास कम होता है
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केंचुए जैसे मिट्टी के जीव प्रभावित होते हैं
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खाद्य श्रृंखला में प्रवेश:
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पौधों द्वारा माइक्रोप्लास्टिक का अवशोषण
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मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा
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कृषि प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की चुनौतियाँ
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नीति उपेक्षा: शहरी कचरा और जल प्रदूषण मुद्दों से ढक जाता है।
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अल्पकालिक दृष्टिकोण: मौसमी फसल उत्पादकता पर ध्यान, दीर्घकालिक प्रभाव की अनदेखी।
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अनभिज्ञ किसान: हानिकारक प्रभावों के बारे में जानकारी की कमी।
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अपर्याप्त नीतियाँ:
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रोडमैप (जैसे महाराष्ट्र प्लास्टिक एक्शन प्लान) कृषि-प्लास्टिक पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते।
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खराब कचरा प्रबंधन:
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वैश्विक स्तर पर केवल 9% प्लास्टिक रीसाइक्ल किया जाता है
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भारत के 90% गाँवों में कचरा प्रबंधन प्रणाली नहीं है
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67% घर प्लास्टिक कचरा जलाते हैं
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ज्ञान का अभाव: कृषि-प्लास्टिक से होने वाले नुकसान की वैज्ञानिक समझ हाल ही में सामने आई है।
कृषि प्लास्टिक प्रदूषण से कैसे निपटें?
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जागरूकता और प्रशिक्षण: किसानों को हानिकारक परिणामों के बारे में शिक्षित करना।
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अनुसंधान और विकास: बायो-प्लास्टिक और टिकाऊ विकल्प विकसित करना।
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सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध: कृषि में सख्त रोक।
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परिपत्र अर्थव्यवस्था दृष्टिकोण: कम करना, पुन: उपयोग करना, पुनर्चक्रण करना।
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नीति और कानूनी कार्रवाई:
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लक्ष्यों के साथ कानूनी रूप से बाध्यकारी ढाँचा
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प्लास्टिक निर्माताओं को जीवन-चक्र के अंत में निपटान की जिम्मेदारी देना
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ग्राम-स्तरीय जलवायु कार्ययोजना:
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कचरा प्रबंधन को जलवायु-सहिष्णु कृषि के साथ जोड़ना
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निगरानी और प्रवर्तन:
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खुले में जलाने, डंपिंग और असुरक्षित निपटान पर दंड
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सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय कचरा प्रबंधन पहल को बढ़ावा देना।
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सतत कृषि पद्धतियाँ:
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पुनर्योजी कृषि (कवर क्रॉपिंग, संरक्षण खेती)
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बायो-मल्चिंग, वर्मी-कम्पोस्टिंग, बायो-उर्वरक, बायो-कीटनाशक
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प्लास्टिक निर्भरता कम करने के लिए मिट्टी और नमी संरक्षण
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FAO दिशानिर्देश:
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2019 के अध्ययन + 2024 का स्वैच्छिक आचार संहिता (कृषि में प्लास्टिक के सतत उपयोग पर)
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त्वरित तथ्य – प्लास्टिक उत्पादन और प्रदूषण
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पहला सिंथेटिक प्लास्टिक: 1907।
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वैश्विक उत्पादन:
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1950 में 2 मिलियन टन
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आज 450 मिलियन टन से अधिक प्रतिवर्ष
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प्लास्टिक कचरे का रिसाव: हर साल 19–23 मिलियन टन जलीय पारिस्थितिक तंत्र में।
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मिट्टी प्रदूषण: हर साल लगभग 13 मिलियन टन कृषि मिट्टी में जमा।
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माइक्रोप्लास्टिक अब जानवरों, पौधों, फलों, बोतलबंद पानी और मानव शरीर में पाए जा रहे हैं।
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उदाहरण: 1 लीटर बोतलबंद पानी में लगभग 2,40,000 प्लास्टिक कण होते हैं।