पृष्ठभूमि
भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने 22 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) का कॉन्सेप्ट मॉडल प्रस्तुत किया। यह भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान और कक्षीय ढाँचा निर्माण क्षमता में एक बड़ा कदम है, विशेषकर गगनयान मिशन के बाद।
मुख्य विशेषताएँ
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वज़न और कक्षा: लगभग 10 टन, निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में (~450 किमी ऊँचाई) संचालन के लिए डिज़ाइन।
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संरचना: मॉड्यूलर डिज़ाइन, जिसमें समय के साथ अतिरिक्त मॉड्यूल जोड़े जा सकते हैं।
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उद्देश्य:
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अंतरिक्ष में लंबी अवधि तक मानव उपस्थिति बनाए रखना।
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सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण (microgravity) में वैज्ञानिक शोध और प्रयोग (जैव विज्ञान, सामग्री विज्ञान, अंतरिक्ष चिकित्सा)।
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उपग्रहों की सर्विसिंग और असेंबली।
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भारत की अंतरिक्ष कूटनीति और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करना।
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समय-सीमा: गगनयान मिशन के बाद, 2030 के आसपास मॉड्यूल लॉन्च की संभावना।
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महत्व:
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भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल होगा।
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अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशनों पर निर्भरता कम होगी।
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आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम।
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UPSC में प्रासंगिकता
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प्रीलिम्स: BAS का वजन, कक्षा, घोषणा का वर्ष।
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मेन (GS-3): भारत की अंतरिक्ष नीति, तकनीकी प्रगति, और रणनीतिक महत्व।
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निबंध/इंटरव्यू: “भारत की तकनीकी प्रगति” या “रणनीतिक मोर्चे के रूप में अंतरिक्ष” जैसे विषयों से जोड़ सकते हैं।