Why in News
-
Recent caste-based killings in Tamil Nadu and other States have reignited debate on honour crimes
-
These incidents highlight how family and community structures continue to legitimise violence in the name of caste and honour
About Honour Killing
-
Definition
-
Murder by family/community members when individuals marry or choose partners outside caste, religion, or clan norms
-
-
Targets
-
Mostly inter-caste or inter-faith couples
-
Particularly Dalit men with dominant-caste women
-
-
Underlying Belief
-
Claimed to “protect honour”
-
In reality about safeguarding caste hierarchy, social control, and patriarchy
-
Causes Behind Honour Killings
-
Caste and Community Pressures
-
Caste endogamy preserves caste hierarchy
-
Families fear loss of “status” if marriages cross caste boundaries
-
Example: Strong backlash in Tamil Nadu against Dalit–dominant caste marriages
-
-
Patriarchal Control
-
Women’s autonomy challenges male dominance
-
Women seen as “bearers of family honour”
-
-
Economic and Social Interests
-
Intra-caste marriages maintain dowry, property rights, and business ties
-
Inter-caste unions threaten these advantages
-
-
Fear of Social Boycott
-
Families fear humiliation or expulsion from caste networks
-
Honour killings act as “deterrent” to others
-
-
Khap and Jati Panchayats
-
In regions like Haryana, UP, caste councils issue diktats against inter-caste marriages
-
Such bodies legitimise violence and weaken law enforcement
-
-
Weak Law Enforcement
-
Police avoid confronting dominant caste groups
-
Lack of protection leaves couples vulnerable
-
Consequences
-
Violation of Fundamental Rights
-
Attacks Article 21 (right to life with dignity) and Article 19 (personal liberty)
-
-
Gender Injustice
-
Women disproportionately face violence
-
-
Perpetuation of Casteism
-
Reinforces caste instead of weakening it
-
-
Threat to Democracy and Rule of Law
-
Parallel caste councils undermine constitutional courts
-
-
Psychological and Social Fear
-
Youth face trauma, insecurity, and hesitation in choosing partners outside caste/religion
-
Legal and Constitutional Safeguards
-
Constitutional Provisions
-
Article 14: Equality before law
-
Article 15: No discrimination on caste, religion, sex
-
Article 19: Freedom of choice and association
-
Article 21: Right to life and liberty
-
-
Statutory Provisions
-
IPC/BNS sections on murder, attempt to murder, conspiracy
-
Prohibition of Child Marriage Act, 2006
-
Hindu Marriage Act, 1955 – protects marriage autonomy
-
-
Proposed Law
-
Prevention of Crimes in the Name of Honour Bill – seeks to criminalise honour killings directly
-
Judicial Stand
-
Lata Singh v. State of UP (2006)
-
SC upheld inter-caste marriages as valid exercise of freedom
-
-
Arumugam Servai v. State of Tamil Nadu (2011)
-
SC declared khap panchayat diktats illegal
-
-
Shakti Vahini v. Union of India (2018)
-
Directed States to establish safe houses for couples
-
Monitor illegal caste gatherings
-
Punish officials failing to prevent honour killings
-
Way Forward
-
Dedicated Law on Honour Crimes
-
Specific legislation with strict punishments and accountability for police failure
-
-
Strengthening Law Enforcement
-
Sensitise police to honour crime cases
-
Swift trials and witness protection for couples
-
-
Community-Level Reform
-
Engage caste and religious leaders in campaigns
-
Promote inter-caste marriages as socially beneficial
-
-
Safe Houses and Support Systems
-
Expand shelters with counselling, legal aid, financial help
-
-
Educational and Digital Counter-Narratives
-
Introduce awareness in schools/colleges on constitutional morality
-
Use social media to challenge caste pride and highlight successful inter-caste unions
-
-
Incentives for Inter-Caste Marriages
-
Strengthen Dr. Ambedkar Scheme for Social Integration with timely aid and social protection
-
Conclusion
-
Honour killings are crimes against individuals and the Constitution
-
They reflect caste hierarchies trying to maintain control
-
The solution lies in
-
Enforcing constitutional morality
-
Empowering youth
-
Strict law enforcement
-
Dismantling family-based caste control
-
-
A society that values freedom of choice over family honour moves closer to real equality and justice
ऑनर किलिंग:
खबरों में क्यों
-
हाल ही में तमिलनाडु और अन्य राज्यों में जाति-आधारित हत्याओं ने ऑनर क्राइम पर बहस को फिर से जीवित कर दिया है
-
ये घटनाएँ दिखाती हैं कि किस तरह परिवार और सामुदायिक ढांचे जाति और “इज़्ज़त” के नाम पर हिंसा को वैध ठहराते रहते हैं
ऑनर किलिंग के बारे में
-
परिभाषा
-
जब व्यक्ति जाति, धर्म या गोत्र की सीमाओं से बाहर शादी करता है या साथी चुनता है, तो परिवार/समुदाय के सदस्य द्वारा की गई हत्या
-
-
लक्ष्य
-
ज़्यादातर अंतर-जातीय या अंतर-धार्मिक जोड़े
-
विशेष रूप से दलित पुरुष और उच्च/प्रभुत्वशाली जाति की महिलाएँ
-
-
मूल विश्वास
-
इसे “इज़्ज़त की रक्षा” कहा जाता है
-
वास्तव में यह जाति पदानुक्रम, सामाजिक नियंत्रण और पितृसत्ता को बचाने के लिए होता है
-
ऑनर किलिंग के पीछे के कारण
-
जाति और समुदाय का दबाव
-
जातिगत अंदरूनी विवाह (एंडोगैमी) जाति पदानुक्रम को बनाए रखता है
-
परिवारों को डर रहता है कि अगर विवाह जाति की सीमाओं से बाहर हुआ तो “प्रतिष्ठा” खो जाएगी
-
उदाहरण: तमिलनाडु में दलित–उच्च जाति विवाहों पर गहरी प्रतिक्रिया
-
-
पितृसत्तात्मक नियंत्रण
-
महिलाओं की स्वतंत्रता पुरुष वर्चस्व को चुनौती देती है
-
महिलाओं को “परिवार की इज़्ज़त की वाहक” माना जाता है
-
-
आर्थिक और सामाजिक हित
-
एक ही जाति में विवाह से दहेज, संपत्ति अधिकार और व्यापारिक संबंध बने रहते हैं
-
अंतर-जातीय विवाह इन लाभों को चुनौती देते हैं
-
-
सामाजिक बहिष्कार का डर
-
परिवारों को अपमान या जातिगत नेटवर्क से निकाले जाने का भय
-
ऑनर किलिंग दूसरों के लिए “निवारक” का काम करती है
-
-
खाप और जाति पंचायतें
-
हरियाणा, यूपी जैसे क्षेत्रों में जातिगत परिषदें अंतर-जातीय विवाहों के खिलाफ फरमान जारी करती हैं
-
ऐसे निकाय हिंसा को वैध ठहराते हैं और कानून के प्रवर्तन को कमजोर करते हैं
-
-
कमजोर कानून प्रवर्तन
-
पुलिस प्रभुत्वशाली जाति समूहों का सामना करने से बचती है
-
सुरक्षा की कमी से जोड़े असुरक्षित रहते हैं
-
परिणाम
-
मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
-
अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 19 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) पर हमला
-
-
लैंगिक अन्याय
-
महिलाएँ असमान रूप से हिंसा का सामना करती हैं
-
-
जातिवाद का स्थायीकरण
-
जाति को कमजोर करने के बजाय और मजबूत करता है
-
-
लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए खतरा
-
समानांतर जाति परिषदें संवैधानिक न्यायालयों को कमजोर करती हैं
-
-
मानसिक और सामाजिक डर
-
युवाओं को आघात, असुरक्षा और जाति/धर्म से बाहर साथी चुनने में हिचकिचाहट होती है
-
कानूनी और संवैधानिक प्रावधान
-
संवैधानिक प्रावधान
-
अनुच्छेद 14: कानून के समक्ष समानता
-
अनुच्छेद 15: जाति, धर्म, लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं
-
अनुच्छेद 19: पसंद और संगठन की स्वतंत्रता
-
अनुच्छेद 21: जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार
-
-
वैधानिक प्रावधान
-
हत्या, हत्या के प्रयास, षड्यंत्र पर आईपीसी/बीएनएस की धाराएँ
-
बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006
-
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 – विवाह की स्वतंत्रता की रक्षा करता है
-
-
प्रस्तावित कानून
-
ऑनर के नाम पर अपराधों की रोकथाम विधेयक – ऑनर किलिंग को सीधे अपराध घोषित करने का प्रयास
-
न्यायिक रुख
-
लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2006)
-
सुप्रीम कोर्ट ने अंतर-जातीय विवाहों को स्वतंत्रता के वैध उपयोग के रूप में बरकरार रखा
-
-
अरुमुगम सर्वई बनाम तमिलनाडु राज्य (2011)
-
सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों के फरमानों को अवैध घोषित किया
-
-
शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ (2018)
-
राज्यों को निर्देश दिए कि
-
जोड़ों के लिए सुरक्षित घर स्थापित करें
-
अवैध जातिगत सभाओं की निगरानी करें
-
ऑनर किलिंग रोकने में विफल अधिकारियों को दंडित करें
-
-
आगे का रास्ता
-
ऑनर क्राइम पर समर्पित कानून
-
सख्त सज़ाओं और पुलिस की विफलता पर जवाबदेही के साथ विशेष कानून
-
-
कानून प्रवर्तन को मजबूत करना
-
पुलिस को ऑनर क्राइम मामलों के प्रति संवेदनशील बनाना
-
तेज़ मुकदमे और जोड़ों के लिए गवाह सुरक्षा
-
-
सामुदायिक स्तर पर सुधार
-
जाति और धार्मिक नेताओं को अभियानों में शामिल करना
-
अंतर-जातीय विवाहों को सामाजिक रूप से लाभकारी के रूप में बढ़ावा देना
-
-
सुरक्षित घर और सहायता प्रणाली
-
परामर्श, कानूनी मदद और आर्थिक सहायता के साथ आश्रयों का विस्तार
-
-
शैक्षणिक और डिजिटल प्रति-आख्यान
-
स्कूलों/कॉलेजों में संवैधानिक नैतिकता पर जागरूकता लाना
-
सोशल मीडिया के जरिए जातीय गर्व को चुनौती देना और सफल अंतर-जातीय विवाहों को उजागर करना
-
-
अंतर-जातीय विवाहों के लिए प्रोत्साहन
-
समय पर सहायता और सामाजिक सुरक्षा के साथ डॉ. अंबेडकर सामाजिक एकीकरण योजना को मजबूत करना
-
निष्कर्ष
-
ऑनर किलिंग व्यक्तियों और संविधान दोनों के खिलाफ अपराध है
-
यह जातिगत पदानुक्रम को नियंत्रण बनाए रखने का प्रयास दर्शाती है
-
समाधान निहित है
-
संवैधानिक नैतिकता लागू करने में
-
युवाओं को सशक्त बनाने में
-
सख्त कानून प्रवर्तन में
-
परिवार-आधारित जातिगत नियंत्रण को समाप्त करने में
-
-
एक ऐसा समाज जो पारिवारिक इज़्ज़त से ऊपर स्वतंत्र पसंद को महत्व देता है, वह वास्तविक समानता और न्याय के और करीब जाता है |